आखिर क्यों जीरो को क्रिकेट में डक कहा जाता है

जब भी कोई बल्लेबाज़ जीरो पर आउट हो जाता है तो आपने अक्सर यह कहते हुए सुना होगा “इट्स अ डक”। आखिर इस शब्द का मतलब क्या है? क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश की? यदि आपको इस शब्द के पीछे का रहस्य नहीं पता तो चलिए आपको आज इसका रहस्य बता ही देते हैं।

इस शब्द के पीछे भी एक कहानी है और इस कहानी से यह शब्द निकल के आया है। बात ऐसी है कि जब ‘वेल्स’ के प्रिंस ‘एडवर्ड 7’ क्रिकेट खेल रहे थे तो वे जीरो पर ही आउट हो गए। यह मनोरंजक किस्सा 17 जुलाई, 1866 में हुआ था जब किसी अख़बार ने यह लिख दिया कि “प्रिंस रिटायर्ड टू द रॉयल पवेलियन ओन अ डक’स एग”| जीरो “0” दिखने में बतख के अंडे के समान लगता है और यही वजह थी कि अखबार में जीरो लिखने के बजाए डक’स एग लिखा गया।

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इसके बाद इस शब्द का प्रयोग टेस्ट क्रिकेट में भी होने लगा। इसके बाद यह डक’स एग से डक ही रह गया और लोग इसी शब्द का प्रयोग करने लगे और देखते ही देखते जीरो क्रिकेट में डक बन गया। ऑक्सफ़ोर्ड शब्दकोष में आज भी जीरो की जगह डक’स एग प्रगोग में लाया जाता है।

टेस्ट मैच में पहला डक ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच हुए मैच में मेलबोर्न में मार्च 1877 में बना था जब नेड ग्रेगोरी जीरो पर आउट हुए थे। तब उनके आउट होने को डक कहकर संबोधित किया था। अभी तक सबसे ज्यादा डक्स का रिकॉर्ड वेस्ट इंडीज के खिलाड़ी ‘कोर्टनेय वाल्श’ का है जो की 43 बार डक पर आउट हुए हैं।

भारत के आल-राउंडर अजित अगरकर को बॉम्बे डक भी कहा जाता है क्यूंकि वे 7 बार लगातार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डक पर आउट हुए थे। ये तो हुई डक की बात पर हमारे पास क्रिकेट में “गोल्डन डक” या “डायमंड डक” भी होती है। आप निश्चय ही इनका मतलब जानते होंगे। यदि आप नहीं जानते तो हम आपको बता देते हैं कि गोल्डन डक तब कहा जाता है जब बल्लेबाज़ पहली बॉल पर ही आउट हो जाता है। यदि बल्लेबाज़ दूसरी बाल पर आउट हो जाए तो वह सिल्वर डक बन जाती है और तीसरी बाल पर ब्रोंज़ डक। डायमंड डक तब कहा जाता है जब बल्लेबाज़ इनिंग की पहली बॉल पर आउट हो जाता है। इसे प्लेटिनियम या रॉयल डक भी कहते हैं। ये भी बता दें की यदि बल्लेबाज़ टेस्ट मैच की दोनों इन्निंग्स में जीरो पर आउट हो जाए तो उसे “पेअर” कहते हैं। लोगों को वेसे ज्यादा सोना, चांदी और हीरे पसंद होते है पर निश्चय ही ये वाले हीरे और सोना नहीं।

तो ये थी डक की कहानी जो आप अब अच्छे से जान गए हैं और अब अगली बार आप यह नाम टीवी पर सुनेंगे तो निश्चय ही यह कहानी याद करेंगे। कैसे एक जीरो को बतख के अंडे के साथ जोड़ा गया और फिर कैसे बतख बन गया, मेरा मतलब डक। हाहा… आप समझ ही गये होंगे ‘बतख’ या ‘डक’!

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