स्वप्ना औगसतिन: एक कलाकार जो अपने पैरो से तस्वीरें बनाती हैं

हर किसी के पास न ऐसा जज़्बा होता है न ही हुनर। स्वप्ना चालीस वर्ष की महिला हैं जो की अपने पैरों और मुह से तस्वीरें बना सकती हैं। स्वप्ना बिना बाजुओं के पैदा हुई थी पर कहते है न कि कुछ करने का ज़ज्वा हो तो आप अपनी मंजिल तक पहुँच ही जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेनात्मक कहानी है स्वप्ना की।

स्वप्ना ने मुश्किलों से आगे बढ़कर वो कर दिखाया जो कर पाना आसान बात नहीं थी और इसका श्रेय वे अपने माँ-बाप और भगवन को देती हैं जिन्होंने उन्हें कठिनाइयों से लड़ने की प्रेरणा दी। वे कहती हैं कि इस उपलब्धि को वे तभी पा पाई हहैं क्यूंकि उनके माता-पिता ने उन्हें इन चुनौतियों से लड़ने का साहस दिया और वे इस मुकाम पर पहुँच पाई।

इनका कार्यक्षेत्र सिर्फ कलाकारी तक ही सीमित नहीं है परन्तु ये वो इंसान हैं जो की भिन-भिन चीजों में शामिल हो कर समाज के लिए भी कार्य कर रही हैं। वे छात्रों के लिए प्रदर्शनी रखती है ताकि उन्हें भी प्रेरणा का स्त्रोत मिले और वे भी अपने सपने पूरे करने के लिए कार्य करें।

हम लोग शायद बहुत सारे बहाने दे कर खुद को सीमित कर देते हैं, वहीँ स्वप्ना हिम्मत और इच्छाशक्ति से कार्य करती हैं। स्वप्ना बच्चपन से अपने कार्य स्वयं करने की कोशिश करती थी और ऐसे ही उन्होंने कलाकारी करनी सीख ली। उन्हें अपने इस हुनर का पता तब चला था जब वे स्कूल में पढ़ा करती थी। इन्हें अपने माता-पिता और अध्यापको का साथ मिला और कुछ नया करने की इच्छाशक्ति भी।

स्वप्ना चाहती तो यह कह सकती थी कि मैं शायद यह नहीं कर पाऊँगी पर उन्होंने कभी अपना आत्मविश्वास नहीं हारा और आगे बढती रही। आप यदि उनके द्वारा बनाए गए चित्र देखेंगे तो निश्चय ही हैरान रह जाएंगे।
“मेरी उपलब्धियों का सारा श्रेय भगवान् और मेरे माता-पिता को जाता है जिन्होंने मुझे प्रेरणा दी की में मुश्किलों का सामना कर सकूँ। हम सब कामयाबी पाने के लिए सक्षम होते हैं पर हम बस उन रुकावटों से आगे देखना भूल जाते हैं।” यह कहता है स्वप्ना का।

स्वप्ना की ज़िन्दगी से हमे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। कुछ करने का ज़ज्बा और आत्मविश्वास कामयाबी की एक सीढ़ी होती है। जब इंसान दृढनिश्चय के साथ कार्य करता है तो वह निश्चय ही अपनी मंजिल तक पहुँच ही जाता है। स्वप्ना ने बिना हाथों से वह कर दिखाया है जो की हम लोग कभी सोच भी नहीं सकते है।

स्वप्ना एक स्वप्न की तरह ही प्रतीत होती हैं, एक ऐसा स्वप्न जिसे उन्होंने देखा और आज पूरा कर के दिखाया है। हम लोग यदि अच्छे से कार्य करें और द्दृढनिश्चय के साथ आगे बढे तो हम भी अपने जीवन में कुछ अलग कर सकते है। बात वहां शुरू होती है जब आप कुछ करने की ठान लेते हैं और बस उसी क्षण आपका एक नया सफ़र शुरू हो जाता है। आशा है स्वप्ना की कहानी ने आपको भी प्रेरणा प्रदान दी होगी।

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