क्या जरुरी था नोटबंदी : Interesting Facts On Demonitisation





8 नवंबर की रात पीएम ने ऐलान के साथ ही एक झटके में 500 और 1000 के पुराने नोट बेकार हो गए. अगले दिन बैंकों में पुराने नोट बदलवाने और एटीएम से पैसे निकालने के लिए लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं. कहा गया कि लोगों की ये दिक्कतें बस कुछ दिनों की हैं. भ्रष्टाचार, काला धन, आतंकवाद और जाली नोटों पर शिकंजा कसने के लिए ये कदम उठाना जरूरी था. लेकिन आज नोटबंदी के इतने दिनों बाद भी यह सवाल उठता है की क्या Demonetization ज़रूरी था ? तो आइये जानते है इस सवाल का जवाब ।

क्यों किया जाता है विमुद्रीकरण ? :-
सरकार ऐसा कई कारणों से कर सकती है। सरकार पुराने नोटों की जगह नए नोट लाने पर पुराने नोटों का विमुद्रीकरण कर देती है। विमुद्रीकरण कालाधन को खत्म करने के लिए भी किया जाता है। यह फैसला आतंकवाद, अपराध और तस्करी जैसे आपराधिक कामों में बड़े पैमाने पर नगद लेन-देन को रोकने के लिए भी होता है। बाजार में कई बार नकली नोट भी प्रचलन में आ जाते हैं। सरकार नकली नोटों से छुटकारा पाने के लिए भी पुराने नोट बदल देती है।

क्या होता है विमुद्रीकरण के बाद ? :-
जब कभी कोई देश विमुद्रीकरण करता है तो दुनिया में उसकी साख गिरती ही है और ये बेहद आम बात है । जीडीपी की भाषा समझने वाले ये भी समझें कि भारत इस बार वृद्धि दर के मामले में पिछड़ने जा रहा है। 2017 वित्त वर्ष में भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था साढ़े 7 फीसदी की दर से बढ़ रही थी. 2015-16 में भारत ने दूसरी बार इस लिहाज से चीन को पछाड़ दिया था मगर नोटबंदी के बाद इस वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ साढ़े 3 फीसदी तक गिरने का अनुमान है।

अब सवाल यह उठता है की क्या विमुद्रीकरण ज़रूरी था ? :-
इसका यह भी कारण हो सकता है की रूपये का कागज तैयार करने के लिए दुनिया में 4 फ़र्म हैं – फ्रांस का अर्जो विगिज,अमेरिका का पोर्टल,स्वीडन का गेन और पेपर फैब्रिक्स ल्युसेंटल ।

इनमें से दो फोर्मो का 2010-11 में पाकिस्तान के साथ भी रूपए के कागज का अनुबंध हो चुका है जिसका भारत ने विरोध भी किया था, अर्थात नोट छापने के लिए जो कागज भारत लेता था वही कागज 2010 से पाकिस्तान भी ले रहा है, फलस्वरूप पाकिस्तान उस कागज के अधिकतम हिस्से का इस्तेमाल भारतीय रूपए(नकली नोट) छाप कर भारत मे भेजने का काम कर रहा है। इंडियन इन्टेलिजेन्स एजेंसीज के मुताबिक पाकिस्तान 15000 खरब डालर नकली भारतीय रूपया छाप कर भारत में सप्लाई करने के लिए तैयार बैठा हैं। और अगर वे नोट बाजार में आ जाते तो अचानक मुद्रास्फीति लगभग दो गुनी बढ़ जाती, महंगाई दो गुनी बढ़ सकती थी ।

इसीलिए भारत सरकार ने अब जर्मनी के एक प्रिंटिंग प्रेस से कागज लेने का अनुबंध किया । साथ ही ये भी अनुबंध किए कि ये कागज जर्मनी किसी अन्य को नहीं दे सकता है । जिससे आतंकवाद, अपराध और तस्करी जैसे आपराधिक कामों में कमी आ सके ।

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