जापान पे परमाणु हुमले की वजह था अहंकार

अगस्ट 1945 में अमेरीका ने जापान के दो मुक्य शहर नागाशाकी और हिराशाकी पर परमाणु बोम्ब गिरा दिए थे। इसके बाद जापानने घुटने टेक दिए और इसिके साथ द्वितिय विश्वयुद्ध का अंत हुआ था। 1945 में मित्र राष्ट्रों और धुरी राष्ट्रों के बीच हुआ द्वितिय विश्वयुद्ध 1914 से 1918 के बीच हुए पहले विश्वयुद्ध से भी भारी पडा था। मित्रा राष्ट्रों की अगुआइ अमरीका, सोवियत संघ, ब्रिटेन और फ्रांस कर रहे थे। जबकी धुरी राष्ट्रों की अगुआइ जर्मनी, इटली और जापान कर रहे थे।

यह युद्ध विश्व के बाहार के इलाके मे भी फैला और इसका विस्तार दक्षिण- पूर्व एशिया, चीन, बर्मा एवं भारत के पूर्वोत्तर के कूछ हिस्सों तक था। हालांकी जापान पे परमाणु बम गिराने के बाद यह युद्ध शांत हो गया। और इसी के साथ शीतयुद्ध की शुरुआत हुइ।

आलोचकों ने अमरिका का परमाणु बोम्ब गिराने के फेसले को गलत बताया था। उनका मानना था कि अमेरिका की इस कार्रवाइ का ल्क्षय सोवियत संघ को एशिया अवं अन्य जगहों पर सैन्य और राजनीतिक लाभ उठाने से रोकना था। सोवियत संघ के सामने यह साबित करना भी चाहते थे की अमरीका ही सबसे बडी ताकत है।

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अमरीका के समर्थकों का तर्क था की दूसरे विश्वययुद्ध को जलदी से जलदी समाप्त करने और साथी राष्ट्रों की आगे की जनहानि को रोकने के लिए परमाणु बम गिराना जरूरी था। लेकिन अमरीका यह अच्छि तरह से जानता था की अब जापान कमजोर पड गया है और जल्द ही अपने घुटने टेक देगा। यह अंदाजा होने के बावजुद अमरीका ने परमाणु बम गिराये थे। जिसका मतलब साफ है की अमरीका अपनी ताकत दिखाना चाहता था।

द्वितिय विश्वयुद्ध खतम होने के साथ ही दो महाशक्तियों संयुक्त राज्य अमरीका और सोवियत संके बिच शुरु हुए शितयुद्ध के साथ ही शुरु हुआ था। अप्रैल 1961 मे सोवियत संघ को चिंता सताने लगी की अमेरीका साम्यवादियों द्वारा शासित क्यूबा पर आक्रमण कर देगा। सोवियत संघ क्यूबा को कूटनयिक एवं वित्तीय सहायता प्रदान करता था। बाद में क्यूबा को रुस के सैनिक अड्डे के रूप में बदलने का फैसला किया गया और 1962 में खुश्चेव ने क्यूबा में परमाणु मिसाइल तैनित कर दीं। इस हथियार की तैनाति के बाद सोवियत संघ अमेरिका के मुख्य भू-भाग के दोगुने ठिकानों या शहरों पर हमला बोल सकता था। जिसकी जानकारी अमेरिका को 3 हफ्ते बाद मिलि थी। अमेरीकी राष्ट्रपति जॉन कैनेडी ऐसा कुछ नहीं चाहते थे जिससे सोवियत संघ हल्ला बोल दे। हालांकी अंतमे दोनो पक्षों ने युद्ध टालने का फैसला किया।

बतादें की अमरीका द्वारा किये गए परमाणु हमले के एक महिने के अंदर ही हिरोशीमा में 1,40,000 से भी अधिक लोगों की हत्या हो गइ थी। और नागाशाकी में परमाणु बम बरसाने के बात 80,000 से भी अधिक लोगो की मोत हुइ थी।

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