5 लक्षण : ऐसे पहचानें मनोरोगी को

सामान्य बिहेव न करना, सिर्फ अपनी ही कहना, बात-बात पर लडऩे के लिए तैयार होना जैसे कई लक्षण मनोरोगियों के होते हैं। लेकिन कई बार हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं। धीरे-धीरे ऐसे लोग दूसरों के लिए परेशानी का कारण बनने लगते हैं। जानिए इन्हें कैसे पहचानें…

1. किसी की न सुनना : अगर कोई सिर्फ और सिर्फ अपनी कह रहा है और आपकी बात सुनने में दिलचस्पी नहीं ले रहा है तो यहां सतर्क होने की जरूरत है। साथ ही आपकी बात सुने बगैर वह निर्णय ले रहा है तो इसे आसानी से नजरअंदाज न करें। ऐसे में उसके बिहेवियर को समझने की जरूरत है। ये अपनी बात को मनवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। जैसे मीटिंग के किसी साथी के सुझाव में कमी निकालकर बेइज्जत करना जैसी आदतें इनमें देखने को मिलती हैं।

2. जरूरत से ज्यादा सॉरी कहना : ऐसे लोग बार-बार अपने फायदे के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं और सम्बंध बनाए रखने के लिए बार-बार सॉरी बोलते हैं। साथ ही जरूरत से ज्यादा इमोशनल होने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा साथी को अपने फेवर में करने के लिए पुरानी बात को याद दिलाकर बार-बार खुद को शर्मिंदा दिखाकर प्यार जताकर उसके मन की हर बात को जानने की कोशिश करते हैं।

3. लक्ष्य को लेकर भ्रमित रहना : अक्सर ये बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। टीम के लिए ये ऐसे लक्ष्य तय कर देते हैं, जिन्हें अचीव कर पाना संभव ही नहीं होता। इसके अलावा बार-बार उन्हें लक्ष्य से भी ज्यादा अचीव करने के लिए उकसाकर परेशान करते रहते हैं। कई बार लक्ष्य अचीव न कर पाने वाले साथी को सबके सामने बुरा-भला भी कहते हैं।

4. नकारात्मक बातें करना : मनोरोगी व्यक्ति हमेशा नकारात्मक किस्से सुनाने के लिए भी जाने जाते हैं। ये हमेशा घर और ऑफिस से जुड़ी बातों को नकारात्मक पहलू के साथ पेश करते हैं। साथ ही उसे मानने के लिए मजबूर करते हैं। ये जहां भी रहते हैं वहां का माहौल नकरात्मक करना इनकी खास आदत में शुमार रहता है।

5. कम नींद लेना : ये रात में 4-5 घंटे से ज्यादा नहीं सोते। इन्हें अक्सर दूसरों के मामलों और घरों में ताकाझाकी करने की आदत रहती है। जैसे ऑफिस में मेल खुला मिलने पर उसकी जांच करना, किसी का सेलफोन मिलने पर उनके फोल्डर को चेक करना, फेसबुक और वॉट्सअप के मैसेज पढऩा उनकी आदत में शुमार होता है।

ऐसे दूर होगी समस्या
– ऐसे लोगों को प्यार से समझाएं जबरदस्ती से नहीं।
– इन्हें ऐसे मामले कहानी की तरह से सुनाकर परिणाम से रूबरू कराएं।
– मनोरोगियों को ज्यादा से ज्यादा सकात्मक कहानियां या महापुरुषों की जीवनी पढऩे के लिए कहें।
– इन्हें आध्यात्म से जोडऩे की कोशिश करें।
– इनके मन की बात जानने की कोशिश करें।
– वीकेंड्स पर घूमाने के लिए ले जाएं ताकि मन के विचार में बदलाव आए।

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