जानिए भारत के पांच रहस्यमय मंदिरों के बारे में

भारत में सैकड़ों साल पुराने ऐसे कई मंदिर हैं जिनसे जुड़े रहस्य आज भी कोई नहीं जान पाया है। इनका सम्बंध न तो किसी वास्तुविज्ञान से हैं और ना ही कोई रीति रिवाज से ताल्लुक है। जानिए ऐसे ही मंदिरों के बारे में…

१. चूहे आकर्षण का केंद्र : राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित करनी माता का मंदिर बेहद अनोखा है। लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां हर मनोकामना पूरी होती है। करनी देवी दुर्गा माता का अवतार हैं। यहां मौजूद २०-२२ हजार चूहे रहस्य का केंद्र हैं। ये कहां से आए और कहां चले जाते हैं यह आज तक कोई नहीं साबित कर पाया है। यहां के चूहों को ‘काबाÓ कहते हैं। यहां इनके लिए खास भोजन की व्यवस्था की जाती है। माना जाता है कि यहां आपको पैर घिसटते हुए चलना पड़ेगा। पैर के नीचे चूहा आना अपशकुन माना जाता है। साथ ही यदि चूहा पैर के ऊपर से निकल गया तो समझिए आपकी मनोकामना पूरी।

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२. सोमनाथ मंदिर : इस मंदिर १२ ज्योर्तिलिंग में से एक है। ऐसा कहा जाता है कि सैकड़ों सालों पहले यहां का शिवलिंग हवा में लटका रहता था। इसे अतिक्रमणकारियों ने तोड़ दिया था। गुजरात के सौराष्ट जिले में बने इस मंदिर का निर्माण स्वयं चंद्रदेव ने किया था। इसके शिवलिंग हवा में झूलते रहने का कारण अब तक किसी को नहीं मालूम है। खास बात यह है कि इस मंदिर को अब तक १७ बार नष्ट कर पुन:निर्माण किया जा चुका है।

३. तांत्रिकों का गढ़ : कामाख्या देवी के मंदिर को तांत्रिकों का गढ़ कहा जाता है। ५१ शक्तिपीठों में से इसे सबसे श्रेष्ठ भी कहा जाता है। गुवाहाटी में स्थित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि सालभर में एक बार गर्भ ग्रह में लगातार तीन दिनों तक जल के स्थान पर रक्त निकलता है। इस मंदिर में रहस्य की भरमार है। जिसके कई किस्से किताबों में दर्ज हैं।

४. कालभैरव मंदिर : उज्जैन स्थित इस मंदिर में काल भैरव की मृर्ति है, जो मदिरापान करने के लिए जानी जाती है। यहां इन्हें मिष्ठान या अन्य चीजों से इतर शराब चढ़ाई जाती है। मान्यता यह भी है कि काल भैरव इस शहर के रक्षक हैं। इस कारण हमेशा इस मंदिर के आसपास शराब हर समय मिलती है। प्रतिमा मदिरापान क्यों करती हैं इसका पता आज तक नहीं चल पाया है।

५. तांबे के पाइप से सालों से हो रहा गैस का रिसाव : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के पास स्थित ज्वालादेवी का मंदिर काफी प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि यहां माता की जीभ गिरी थी। इस कारण यहां देवी के मुख से आग निकल रही है। इस जगह एक तांबे का पाइप भी है। जाहं से सालों से प्राकृतिक गैस का रिसाव हो रहा है। यहां आग की ९ लपटें निकलती हैं और अलग-अलग देवियों के होने का प्रमाण हैं।

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